Mission for Aatmanirbharta in Pulses – किसान भाईयों के लिए खुशखबरी, दाल उत्पादन बढ़ाने नई योजना शुरू

Mission for Aatmanirbharta in Pulses – किसान भाईयों के लिए खुशखबरी, दाल उत्पादन बढ़ाने नई योजना शुरू

🎯 मिशन क्या है — उद्देश्य

  • यह Mission for Aatmanirbharta in Pulses भारत को दालों (पल्स / pulses) में आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। यानी — दाल की देश में उत्पादन क्षमता इतनी हो कि हम आयात (import) पर निर्भर न रहें।
  • भारत में दालों की मांग बढ़ रही है, लेकिन वर्तमान उत्पादन पर्याप्त नहीं है — जिससे 15–20% तक दाल आयात करना पड़ता है।
  • इस मिशन का लक्ष्य है 2030-31 तक दालों की उत्पादन क्षमता, क्षेत्र और उत्पादकता (yield) सभी बढ़ाना।

📅 मिशन अवधि, बजट और लक्ष्य

  • अवधि: 2025-26 से 2030-31 — कुल 6 साल।
  • बजट: कुल ₹ 11,440 करोड़
  • लक्ष्य:
    • उत्पादन: देश की दाल उत्पादन को बढ़ाकर 350 लाख (35 मिलियन) टन तक लाना।
    • खेती के लिए कुल क्षेत्र (cultivation area): इसे बढ़ाकर ≈ 310 लाख हेक्टेयर करना।
    • उत्पादकता (yield): प्रति हेक्टेयर उपज को 1130 किलोग्राम/हेक्टेयर तक लाना।
    • किसानों के लिए लाभ: अनुमान है कि करीब 2 करोड़ किसान इस मिशन से लाभान्वित होंगे।

✅ इससे किसानों और देश को क्या लाभ होंगे

  • दालों का उत्पादन बढ़ेगा → दालों की कमी, आयात और दामों में उतार-चढ़ाव कम होंगे।
  • किसानों की आमदनी बढ़ेगी — बेहतर बीज, सरकारी खरीद, मूल्य सुरक्षा, प्रोसेसिंग सुविधा आदि से।
  • खेती योग्य भूमि का बेहतर उपयोग — खाली पड़े भूमि (rice-fallow आदि) दालों की खेती में आएँगी।
  • रोज़गार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा — प्रोसेसिंग यूनिट्स, खाद्य मूल्य श्रृंखला, आदि से।
  • कृषि में आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और जलवायु-सक्षम खेती के कारण दीर्घकालीन स्थिरता, मिट्टी की सेहत व पर्यावरणीय लाभ।
Aatmanirbharta

📝 आवेदन प्रक्रिया (Aavedan Prakriya) – आसान स्टेप्स में

अभी तक कोई राष्ट्र-स्तरीय ऑनलाइन फॉर्म जारी नहीं हुआ है, इसलिए आवेदन राज्य के कृषि विभाग / ब्लॉक ऑफिस के माध्यम से किया जाएगा।

Step 1: अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें

  • नजदीकी कृषि कार्यालय / ब्लॉक कृषि अधिकारी से मिलें।
  • पूछें: “क्या हमारा गाँव Mission for Aatmanirbharta in Pulses के क्लस्टर में शामिल है?”
  • यदि शामिल है → पंजीकरण फॉर्म लें।

Step 2: किसान पंजीकरण (Farmer Registration)

फॉर्म में आमतौर पर यह जानकारी भरनी होती है:

  • किसान का नाम
  • आधार नंबर
  • जमीन का विवरण (खसरा/खतौनी)
  • बैंक खाता विवरण
  • मोबाइल नंबर
  • किस दाल की खेती करना चाहते हैं (Tur/Urad/Masoor आदि)

फॉर्म जमा करें और पंजीकरण पर्ची/रसीद ले लें।


Step 3: बीज / Seed-Kits के लिए आवेदन

  • Aatmanirbharta मिशन के तहत प्रमाणित बीज और कुछ किसानों को मुफ़्त Seed-Kit मिलती है।
  • कृषि अधिकारी से पूछें कि आपके लिए किसकी उपलब्धता है।
  • उपलब्धता के अनुसार बीज वितरण तिथि और स्थान नोट करें।

Step 4: खेती शुरू करना

  • मिट्टी परीक्षण (Soil Test) करवाएँ।
  • कृषि विभाग / KVK द्वारा सुझाए गए उन्नत बीज और फसल पद्धतियाँ अपनाएँ।

Step 5: प्रशिक्षण में भाग लें (Optional but Helpful)

  • KVK, कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय कृषि विभाग द्वारा दिया गया दाल-संबंधित प्रशिक्षण लें।
  • इससे उत्पादन बढ़ेगा और MSP बिक्री में आसानी होगी।

Step 6: फसल तैयार होने पर MSP पंजीकरण

  • MSP के तहत Tur, Urad और Masoor की 100% खरीद गारंटी दी जा रही है।
  • MSP के लिए NAFED / NCCF में पंजीकरण कराएँ (आपका कृषि अधिकारी बताएगा)।
  • अपनी पहचान और भूमि सत्यापन करवाएँ।

Step 7: फसल बेचें और भुगतान प्राप्त करें

  • फसल को नज़दीकी सरकारी खरीद केंद्र पर ले जाएँ।
  • वजन, गुणवत्ता चेक होने के बाद 7–10 दिन में भुगतान आपके बैंक खाते में आएगा।

अधिकारिक (सरकारी) वेबसाइट/ लिंक है जहाँ से आप Mission for Aatmanirbharta in Pulses की आधिकारिक सूचना देख सकते हैं:

  • आधिकारिक PIB प्रेस रिलीज: “Union Cabinet Approves Mission for Aatmanirbharta in Pulses”

📄 आवेदन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

  • आधार कार्ड
  • जमीन का रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी / 7/12 / 8A)
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर
  • किसान फोटो
  • खेती का क्षेत्र (हेक्टेयर में)
  • फसल का चयन (Tur / Urad / Masoor आदि)

🧑‍🌾 प्रमुख कदम — क्या-क्या होगा

इस Aatmanirbharta मिशन में कई प्रकार की योजनाएँ और सुविधाएं शामिल हैं — ताकि दाल उत्पादन, गुणवत्ता, बाज़ार और किसानों की आमदनी — सब बेहतर हो सकें:

  1. बेहतर बीज (Seeds) और रिसर्च
    • मिशन की कोशिश होगी कि नई, उच्च उपज देने वाली, कीट-रोधी (pest-resistant) और बदलते मौसम (climate-resilient) दालों की किस्में तैयार हों।
    • राज्य सरकारें 5-साल के “rolling seed production plans” बनाएँगी।
    • बीज वितरण — 126 लाख क्विंटल प्रमाणित (certified) बीज किसानों को दिए जाएंगे, जो लगभग 370 लाख हेक्टेयर खेती को कवर करेगा।
    • इसके अलावा, 88 लाख सेड-किट (seed kits) किसानों को मुफ़्त दिए जाएंगे, ताकि नई फसल प्रारंभ हो सके, विशेष रूप से वे खेत जहाँ पहले नहीं दाल होती थी (जैसे rice-fallow areas)।
  2. खेती की जगह (Area expansion) + फसल विविधता (Crop diversification)
    • Aatmanirbharta मिशन का लक्ष्य है कि 35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को दाल की खेती के लिए लाया जाए — खासकर उन इलाकों में जहाँ पहले अन्य फसलें होती थीं या भूमि खाली थी (जैसे rice-fallow land)।
    • इसके लिए इंटर्क्रॉपिंग (intercropping), फसल विविधीकरण (crop diversification) जैसे तरीके अपनाए जाएंगे।
  3. कृषक प्रशिक्षण और आधुनिक खेती के तरीके
    • किसानों और बीज उत्पादकों (seed-growers) को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, मिट्टी स्वस्थ्य प्रबंधन, संतुलित खाद, पौधा सुरक्षा (plant protection), आदि के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
    • इस तरह खेती की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होगा।
  4. अनुपालन / ट्रैकिंग (Seed-traceability और गुणवत्ता नियंत्रण)
    • बीज आपूर्ति और गुणवत्ता पर निगरानी के लिए एक डिजिटल पोर्टल — Aatmanirbharta SATHI Portal (Seed Authentication, Traceability & Holistic Inventory) — इस्तेमाल किया जाएगा।
  5. पश्चात्-कृषि ढांचा और मूल्य श्रृंखला (Post-harvest infrastructure & value chain)
    • दालों की कटाई के बाद सही तरीके से सुखाना, स्टोर करना, प्रोसेसिंग करना — ताकि दाल खराब न हो और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।
    • इसके लिए 1,000 प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट्स बनाए जाएंगे। हर यूनिट लगाने पर सरकार से ₹ 25 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
  6. खरीदनी (Procurement) — MSP आदि गारंटी
    • Aatmanirbharta मिशन के तहत, अगले चार सालों के लिए, तीन मुख्य दालों — Tur (अरहर), Urad (उड़द) और Masoor (मसूर) — की 100% सरकारी खरीद (MSP / PSS) सुनिश्चित होगी, यदि किसान निर्धारित एजेंसियों के साथ पंजीकृत होते हैं।
    • खरीदारी एजेंसियाँ: NAFED और NCCF होंगी।
  7. क्लस्टर आधारित तरीके से क्रियान्वयन (Cluster-based approach)
    • Aatmanirbharta मिशन पूरे देश में “क्लस्टर” स्तर पर लागू होगा — यानी जहाँ खेती होती है, किसान हैं, वहाँ की ज़रूरतों के हिसाब से बीज, प्रशिक्षण, खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि तय होंगे।
Aatmanirbharta

ℹ️ क्या यह वाकई “नई” है — और क्या पहले की योजनाओं से अलग है?

  • हाँ — यह Aatmanirbharta मिशन विशेष रूप से 2025-31 के लिए है, और इसे नए ढंग से लॉन्च किया गया है।
  • पहले भी देश में दालों / कृषि से जुड़ी योजनाएं थीं, लेकिन यह मिशन — बीज से लेकर मार्केटिंग, प्रोसेसिंग, खरीद, आधुनिक खेती — सबको एक साथ जोड़ता है। यानी सिर्फ खेती नहीं, संपूर्ण वैल्यू चेन (value chain) सुधारने की दिशा में है।
  • इसके तहत MSP की गारंटी, आधुनिक बीज, बड़े पैमाने पर क्षेत्र विस्तार, क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण — पहले से ज़्यादा संरचित है।

✍️ निष्कर्ष

“Mission for Aatmanirbharta in Pulses” — एक महत्वाकांक्षी और व्यापक मिशन है, जो सिर्फ किसानों की मदद नहीं करता, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि आप खेती से जुड़े हैं — तो इस योजना का लाभ उठाना समझदारी होगी।

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